Tuesday, October 30, 2007

No smoking review / धुम्रपान निषेध है - Screenplay के लिए खेद है !

|| श्री श्री गुरु घंटाल बाबा बंगाली वाले की जय ||

फिल्म पर कुछ लिखने से पहेले ही ज़ोर से बोल दूँ के मैंने ज़िंदगी में कभी सिगरेट को मुह से लगा कर जलाया नही है, अलबत्ता हाथ में ज़रूर लिया है । तो शायद मेरा experience धुम्रक्क्ड ! लोगों से अलग हो

दाद देनी पड़ेगी अनुराग को , खाज और खुजली भी देनी पड़ेगी , क्योंकी अगर इनके सिवा उनकी कल्पना शक्ती इतनी गिर सकती है तो इनके साथ वे क्या गुल खिलाएँगे पता नहीं , seriously , ये फिल्म मुझे पसंद आनी चाहिए थी क्योंकि ये एक PJ है , और मैं भी एक PJ हूँ | इसमें एक जोक परेश रावल जॉन अब्राहम के साथ करते हैं , दूसरा अनुराग हमारे साथ करते हैं | दिल तो करता है के मैं भी कुछ ऐसा लिखूं की "फिल्म देखते हुए ऐसा लग रहा था के उंगलियाँ रणवीर की कट रही हैं और दिमाग मेरा (बचा है थोडा बहुत) " पर ये कुछ ऐसा है जो और कोई निर्देशक attempt भी नहीं करेगा (राकेश 'अक्स' मेहरा भी नहीं) और ऐसे प्रयोगों की बहुत आवश्यकता है यशराज और प्रियदर्शन के पागलपन के बीच में . सिर्फ फिल्म की संकल्पना ही इतना प्रभावित करती है , अगर execution भी उतना ही बढिया होता तो क्या बात थी | इसलिए जाइये no smoking देखिये और अगर आप असली मज़े उठाना चाहते हैं तो अपने किसी मित्र को साथ ले जाइये और फिल्म देखते समय उसके चेहरे का हाल देखिये ! :P

Anyway, this couldve been cannes material, right now it is trash can's material. Just jauking :)

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